द्रोणाचार्य पुरस्कार

द्रोणाचार्य पुरस्कार भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा उत्कृष्ट कोचों को दिया जाने वाला वार्षिक सम्मान है, जिसका नाम महाभारत के महान गुरु द्रोणाचार्य के नाम पर रखा गया है। 1985 में स्थापित यह पुरस्कार ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को सफलता दिलाने वाले कोचों को दिया जाता है। पुरस्कार में कांस्य प्रतिमा, प्रमाणपत्र, औपचारिक पोशाक और 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है। पहले प्राप्तकर्ता 1985 में भालचंद्र भागवत (कुश्ती), ओम प्रकाश भारद्वाज (मुक्केबाज़ी) और ओ.एम. नांबियार (एथलेटिक्स) थे। आमतौर पर प्रति वर्ष पाँच से अधिक कोच नहीं चुने जाते, लेकिन कुछ वर्षों में अपवाद भी हुए हैं। 2020 में रमेश पधनी (हॉकी), नरेश कुमार (टेनिस), शिव सिंह (मुक्केबाज़ी), पुरुषोत्तम रॉय (एथलेटिक्स) और जयपाल राणा (शूटिंग) को आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।