सुनीति कुमार चटर्जी
सुनीति कुमार चटर्जी: भारत के महान भाषाविद्
सुनीति कुमार चटर्जी (26 अक्टूबर 1890 – 29 मई 1977) भारत के प्रख्यात भाषाविद्, साहित्यकार और कला-प्रेमी थे, जिन्होंने भाषा विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। हावड़ा के शिवपुर गाँव में जन्मे चटर्जी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया और फिर लंदन विश्वविद्यालय से ध्वनिशास्त्र में डिप्लोमा तथा डी.लिट् की उपाधि प्राप्त की। वे ग्रीक, लैटिन, फ्रेंच, जर्मन, संस्कृत, फारसी सहित दर्जनों भारतीय एवं यूरोपीय भाषाओं के ज्ञाता थे, और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "द ओरिजिन एंड डेवलपमेंट ऑफ़ द बंगाली लैंग्वेज" आज भी शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ है। उन्होंने 1922 से 1952 तक कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में सेवा की, और 1964 में उन्हें राष्ट्रीय प्रोफेसर की उपाधि प्रदान की गई। भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया, तथा वे संस्कृत आयोग के अध्यक्ष और 1969 से 1977 तक साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भी रहे। बांग्ला, अंग्रेजी और हिंदी में 43 से अधिक पुस्तकें लिखने वाले इस महान विद्वान का 86 वर्ष की आयु में कोलकाता में निधन हुआ।
Source: सुनीति कुमार चटर्जी — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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