अपपठन

अपपठन (डिस्लेक्सिया) एक अधिगम विकलांगता है, जिसमें व्यक्ति को लिखित भाषा को पढ़ने में कठिनाई होती है। यह समस्या बुद्धि, दृष्टि या श्रवण की कमी से नहीं, बल्कि मस्तिष्क द्वारा भाषा को संसाधित करने के तरीके में अंतर के कारण होती है, इसलिए यह एक बौद्धिक अक्षमता नहीं है। इसकी कोई एक परिभाषा नहीं है, क्योंकि यह कई अलग-अलग प्रकार की पठन कठिनाइयों को समाहित करने वाला एक समूह है। इसका नामकरण जर्मन नेत्रचिकित्सक रुडोल्फ बर्लिन ने 1887 में किया था, जबकि डब्ल्यू. प्रिंगल मोर्गन ने 1896 में इसका पहला वैज्ञानिक वर्णन किया। 1925 में, शमूएल टी. और्टन ने इसे मस्तिष्क की क्षति से असंबंधित एक सिंड्रोम बताया, और उन्होंने ऐना गिलिंघम के साथ मिलकर इसके लिए एक बहु-संवेदी शिक्षण पद्धति विकसित की। आधुनिक शोध में मुख्यतः यूरोपीय भाषाओं पर केंद्रित है, जबकि डिस्लेक्सिया के 'सतही' और 'ध्वनिकृत' (सुरीला) जैसे विभिन्न प्रकारों की पहचान भी की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कई तंत्रों और कारणों से उत्पन्न हो सकता है।