स्वाइन फ्लू - २००९ में भारत में फैली महामारी
2009 में भारत में H1N1 (स्वाइन फ्लू) महामारी फैली, जिसकी शुरुआत मार्च में हवाई अड्डों पर यात्रियों की जांच से हुई और 13 मई को हैदराबाद में पहला मामला दर्ज किया गया। यह वायरस मानव, पक्षी और सुअर के फ्लू उपभेदों के उत्परिवर्तन से बना था, जो खांसी-छींक से फैलता था, और पुणे में एक 14 वर्षीय लड़की की मौत के साथ इस वायरस ने पहली जान ली। सरकार ने वायरस के दवा-प्रतिरोधी बनने के डर से टैमीफ्लू को आम दुकानों पर बेचने पर रोक लगाई थी, लेकिन बाद में नेटको फार्मा और स्ट्राइड्स जैसी कंपनियों ने इसके जेनेरिक रूप (नेटफ्लू, स्टारफ्लू) लॉन्च किए। 24 मई 2010 तक 10,193 मामलों और 1,035 मौतों की पुष्टि हुई, जो अगस्त 2010 तक बढ़कर 1,833 मौतों तक पहुंच गई; इसी बीच 18 अक्टूबर 2010 को भारत की पहली स्वदेशी सेल-कल्चर वैक्सीन 'HNVAC' लॉन्च की गई। नवंबर 2010 तक मौतों का आंकड़ा 503 तक पहुंच गया, जो इस महामारी के भीषण प्रभाव और देशभर में फैले आतंक को रेखांकित करता है।
Source: स्वाइन फ्लू - २००९ में भारत में फैली महामारी — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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