भारत-ईरान सम्बन्ध

भारत-ईरान संबंध की नींव 15 मार्च 1950 को पड़ी, जब दोनों देशों ने औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए, हालांकि सिंधु घाटी सभ्यता के काल से ही इनके सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क सहस्राब्दियों पुराने हैं। प्रागैतिहासिक मुहरें मेसोपोटामिया में भी मिली हैं, और भारत-ईरानी आर्यों के धर्म, समाज और भाषा में गहरी समानता देखी जा सकती है। शीत युद्ध के दौरान भारत की गुटनिरपेक्षता और ईरान की पश्चिमी ब्लॉक से निकटता के कारण मतभेद रहे, लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद संबंधों में क्षणिक सुधार हुआ। दोनों देशों ने अफ़गानिस्तान में तालिबान का विरोध किया, परंतु भारत ने ईरान के विपरीत नाटो की उपस्थिति का समर्थन किया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कड़ा विरोध व्यक्त किया। आर्थिक स्तर पर, ईरान भारत को 425,000 बैरल से अधिक कच्चा तेल प्रतिदिन सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, और भारत ईरान के तेल व गैस उद्योग में बड़ा विदेशी निवेशक है; हालांकि 2011 में लगे प्रतिबंधों के चलते 12 अरब डॉलर का वार्षिक तेल व्यापार बाधित हो गया था। 2005 के एक बीबीसी सर्वेक्षण के अनुसार, 71% ईरानियों ने भारत के प्रभाव को सकारात्मक रूप से देखा, जो विश्व में भारत के लिए सबसे अनुकूल रेटिंग में से एक है।