फ़सल
कृषि का आधार कही जाने वाली फसलें वनस्पतियों का वह रूप हैं जिन्हें मानव एवं पालतू पशुओं के उपभोग के लिए उगाकर काटा या तोड़ा जाता है, जैसे गेहूँ के दाने या आम के फल। भारत में इन्हें मुख्यतः ऋतुओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है—अक्टूबर-नवम्बर में बोई जाने वाली रबी फसलें (गेहूँ, चना, सरसों), जून-जुलाई में बोई जाने वाली खरीफ फसलें (बाजरा, कपास, मक्का) और फरवरी-मार्च में बोई जाने वाली जायद फसलें (खरबूजा, लौकी, ककड़ी)। जीवनचक्र के आधार पर ये एकवर्षीय (धान), द्विवर्षीय (प्याज) या बहुवर्षीय (नीपियर घास) होती हैं, तो वहीं उपयोगिता के आधार पर इन्हें अन्न, तिलहन, दलहन, रेशेदार (जूट, कपास), मसाले तथा औषधीय फसलों में बाँटा जाता है। विशेष श्रेणियों में नकदी फसलें (गन्ना, तम्बाकू), मृदा रक्षक फसलें (मूँगफली) और हरी खाद वाली फसलें (ढैंचा) शामिल हैं, जो पर्यावरण और किसानों की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल जैसे क्षेत्रों में रबी और खरीफ का चक्र ग्रामीण जीवन को गहराई से प्रभावित करता है, जो त्योहारों से लेकर रोजगार तक हर चीज़ को निर्धारित करता है। इस लेख में केवल सामान्य वर्गीकरण ही नहीं, बल्कि बरसीम जैसी चारा फसल की उन्नत किस्मों (जैसे बरदान, वी.एल. 1) के नाम भी दिए गए हैं, जो भारतीय कृषि अनुसंधान की समृद्धि को दर्शाता है।
Source: फ़सल — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi