चौरी चौरा कांड

चौरी चौरा कांड: एक ऐतिहासिक घटना

५ फरवरी १९२२ को ब्रिटिश भारत के गोरखपुर जिले (संयुक्त प्रांत) के चौरी चौरा नामक स्थान पर असहयोग आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। मौलाना लुत्फुर रहमान हरसिंहपुरी के नेतृत्व में एकत्रित प्रदर्शनकारियों ने पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिसमें २२ पुलिसकर्मियों और ३ नागरिकों की मृत्यु हो गई।

इस हिंसा से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को तुरंत समाप्त करने की घोषणा की, जिसका क्रांतिकारियों (विशेषकर रामप्रसाद बिस्मिल) ने विरोध किया। मुकदमे की पैरवी करने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से १५१ अभियुक्तों को फाँसी से बचाया गया, परंतु १९ लोगों को जुलाई १९२३ में फाँसी दे दी गई। साथ ही, १४ लोगों को आजीवन कारावास और १९ लोगों को ८ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा मिली।

आज चौरी चौरा में शहीदों की स्मृति में एक त्रिकोणीय स्मारक और संग्रहालय बना है, तथा कानपुर-गोरखपुर के बीच 'चौरी-चौरा एक्सप्रेस' नामक रेलगाड़ी भी चलाई जाती है। इस घटना पर आधारित 'प्रतिकार चौरी चौरा' नामक फिल्म का निर्माण भी अभिक भानु द्वारा किया गया है, जिसमें रवि किशन ने मुख्य भूमिका निभाई है।