तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी

तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी: एक संक्षिप्त परिचय

तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी (तमिलनाडु मुक्ति सेना) एक उग्र-अलगाववादी संगठन है, जिसका गठन 1985 में एक स्वतंत्र तमिल राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से किया गया था। इसकी स्थापना तमिलनाडु कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के सैन्य दल के रूप में हुई, और पनपरापी गाँव के इंजीनियरिंग छात्र तामिज़रासन इसके प्रमुख नेता बने। संगठन अपनी गतिविधियों में बम विस्फोट, हत्याएं और बैंक डकैतियों जैसे अपराधों को अंजाम देता था, जिसे वे "लोगों के दुश्मनों का सफाया" बताते थे।

तामिज़रासन की मृत्यु 1 सितंबर 1987 को एक बैंक लूट के प्रयास के दौरान हुई, जिसके बाद लेनिन नामक नेता ने संगठन की कमान संभाली। लेनिन के नेतृत्व में संगठन ने पुलिस थानों पर बमबारी और हथियार चोरी जैसी गतिविधियाँ तेज कर दीं, लेकिन 1994 में एक बम विस्फोट में लेनिन की भी मौत हो गई। इस गिरोह ने जुलाई 2000 में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता डॉ. राजकुमार का अपहरण करके सुर्खियाँ बटोरीं। माना जाता है कि संगठन को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE) से समर्थन मिलता था।

तमिलनाडु सरकार ने 2002 में और भारत सरकार ने भी इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया। संगठन का सपना एक बृहद तमिल राष्ट्र का है, जिसमें तमिलनाडु, लक्षद्वीप, मिनिकोय द्वीप, श्रीलंका का तमिल ईलम क्षेत्र, मालदीव, मलेशिया, सिंगापुर और मॉरीशस शामिल होंगे।