वर्षा

यहाँ प्रस्तुत है वर्षा (बारिश) पर विकिपीडिया लेख का एक व्यापक सारांश, जो सामान्य पाठकों के लिए सरल भाषा में लिखा गया है:

वर्षा पृथ्वी के जलचक्र का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसमें सतह से जल वाष्पित होकर ऊपर उठता है, ठंडा होता है, और संघनन के कारण पानी की बूंदों या ओलों के रूप में वापस धरती पर गिरता है। इसके लिए दो मुख्य शर्तें आवश्यक हैं: वायु में पर्याप्त जलवाष्प होना, और वाष्पयुक्त वायु का शीतल पदार्थों के संपर्क में आकर ओसांक तक ठंडा होना। वर्षा के तीन मुख्य प्रकार होते हैं: संवहनीय वर्षा (दिन की अत्यधिक गर्मी से), पर्वतकृत वर्षा (पर्वतों के अवरोध से, जो भारत जैसे मानसूनी प्रदेशों में प्रचलित है), और चक्रवातीय वर्षा (गर्म तथा शीतल वायुराशियों के मिलने से)। वर्षा की मात्रा को वर्षामापी (Rain Gauge) नामक यंत्र से मापा जाता है, जिसे खुले स्थान पर रखकर बरसे पानी को इंच या सेंटीमीटर में मापा जाता है। रोचक बात यह है कि पौराणिक महाभारत काल में वर्षा को कर्ण की पत्नी के रूप में भी वर्णित किया गया है, जो इस प्राकृतिक घटना को सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से भी जोड़ता है।