फेंग शुई
फेंग शुई: प्राचीन चीनी सौन्दर्यशास्त्र की पद्धति
फेंग शुई (शाब्दिक अर्थ: "हवा-पानी") चीन की एक प्राचीन कला है, जो स्वर्ग (ज्योतिष) और धरती (भूगोल) के नियमों के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा (ची) प्राप्त करके जीवन में सुधार लाने का विश्वास करती है। इसका मूल नाम कान यु (堪舆) था, जिसका अर्थ है "स्वर्ग और धरती का ताओ", और इसका प्रयोग ऐतिहासिक रूप से मक़बरों, निवास-स्थानों और आत्मिक महत्व वाले भवनों के निर्माण में किया जाता था।
इस कला के सबसे प्रारंभिक प्रमाण यांगशाओ और होंगशान संस्कृतियों (~4000 ई.पू.) में मिलते हैं, जहाँ बैंपो निवासों के दरवाजे शिशिर अयनांत के बाद तारों की दिशा में बनाए जाते थे ताकि अधिकतम सौर ऊर्जा मिल सके। पुयांग की एक कब्र (~4000 ई.पू.) में चमकते शीशों से बना ड्रैगन-टाइगर नक्षत्रों का नक्शा भी मिला है। चुंबकीय कम्पास के आविष्कार से पहले, यह विद्या पूरी तरह ज्योतिष पर निर्भर थी, बाद में इसके नियम झोउ युग की निर्देशिकाओं (काओगोंग जी और लू बान जिंग) में कूटबद्ध किए गए।
1960 के दशक की सांस्कृतिक क्रांति के दौरान चीन में फेंग शुई को दबा दिया गया, लेकिन बाद में, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में, इसकी लोकप्रियता में भारी वृद्धि हुई और यह वैश्विक स्तर पर चर्चित बन गई।
Source: फेंग शुई — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi