सर्वांगसमता
ज्यामिति में, दो आकृतियाँ सर्वांगसम (congruent) तब कहलाती हैं जब उन्हें स्थानांतरण, घूर्णन या परावर्तन जैसे परिवर्तनों द्वारा एक-दूसरे पर बिल्कुल ठीक बैठाया जा सके, यानी उनका आकार और माप (size) समान हो। त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए मुख्यतः चार मानदंड प्रयोग होते हैं: SSS (तीनों भुजाएँ), SAS (दो भुजाएँ और बीच का कोण), ASA (दो कोण और उनकी सम्मिलित भुजा, जिसका श्रेय यूनानी गणितज्ञ थेल्स को दिया जाता है), और AAS (दो कोण और एक गैर-सम्मिलित भुजा)। समकोण त्रिभुजों के लिए एक विशेष नियम RHS (समकोण-कर्ण-भुजा) भी है, जिसमें कर्ण और एक भुजा की समानता पर सर्वांगसमता सिद्ध होती है। हालाँकि, ध्यान रखें कि SSA स्थिति सामान्यतः सर्वांगसमता सिद्ध नहीं करती, क्योंकि यह एक अस्पष्ट (ambiguous) मामला है, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे समकोण या अधिक कोण होने के। वहीं, AAA (तीनों कोण समान) की स्थिति में त्रिभुज केवल समरूप (similar) होते हैं, सर्वांगसम नहीं, क्योंकि यह आकार (size) के बारे में कोई जानकारी नहीं देता।
Source: सर्वांगसमता — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi