सिंधु जल समझौता

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे का एक ऐतिहासिक समझौता है, जिस पर 19 सितंबर 1960 को कराची में विश्व बैंक की मध्यस्थता में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पूर्ण नियंत्रण भारत को तथा पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया, हालाँकि भारत को पश्चिमी नदियों के जल का सीमित उपयोग सिंचाई, परिवहन और बिजली उत्पादन के लिए करने की अनुमति है, जिससे उसे कुल पानी का केवल 20% ही मिलता है। यह समझौता पाकिस्तान के इस भय का परिणाम था कि नदियों का उद्गम भारत में होने के कारण युद्ध या तनाव की स्थिति में उसे सूखे और अकाल का सामना करना पड़ सकता है। दशकों तक इस संधि के अंतर्गत स्थायी सिंधु आयोग के माध्यम से दोनों देशों के बीच विवादों का कानूनी निपटारा होता रहा। हालाँकि, 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगांव (बैसरन घाटी) में हुए आतंकवादी हमले में 28 भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भारत ने इस संधि को अपनी ओर से निलंबित कर दिया है, जिससे अब भारत के पास अपनी नदियों के पूरे जल का उपयोग सिंचाई, जल संचय और विद्युत उत्पादन के लिए करने का कानूनी मार्ग खुल गया है।