आयकर

आयकर सरकार द्वारा व्यक्तियों और व्यवसायों की वित्तीय आय पर लगाया जाने वाला एक अनिवार्य कर है, जो सरकारी गतिविधियों और जनसेवा के वित्तपोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में इसे आयकर अधिनियम, 1961 के तहत लागू किया जाता है, जहाँ वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक और नई कर व्यवस्था में ₹7 लाख तक की आय पर छूट है (हालाँकि बजट 2025 में नई व्यवस्था के तहत यह छूट बढ़ाकर ₹12 लाख करने की घोषणा की गई है)। इसके अतिरिक्त, ₹50 लाख से अधिक आय वालों पर 10% से लेकर ₹5 करोड़ से अधिक आय पर 37% तक का अधिभार लगता है, और कुल आय को पाँच मुख्य स्रोतों—वेतन, गृह संपत्ति, व्यवसाय/पेशा, पूंजीगत लाभ, तथा अन्य स्रोत—में वर्गीकृत किया जाता है। सरकार पुराने कानून को बदलने की तैयारी में है, और कैबिनेट ने 7 फरवरी 2025 को नए आयकर बिल को मंजूरी दे दी है। वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में व्यक्तिगत आयकर बिल्कुल नहीं लगाया जाता, जबकि कतर में स्थानीय कर्मचारियों के लिए पाँच प्रतिशत की दर से सामाजिक सुरक्षा योगदान लागू है। इस प्रकार, आयकर की संरचना और दरें देश-दर-देश अलग-अलग होती हैं, जो सरकार की आर्थिक नीति और करदाताओं के वर्गीकरण को दर्शाती हैं।