क्यूबाई मिसाइल संकट

क्यूबाई मिसाइल संकट अक्टूबर 1962 में शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ, क्यूबा और अमेरिका के बीच हुआ एक गंभीर टकराव था, जिसने दुनिया को परमाणु युद्ध के कगार पर ला दिया। सोवियत संघ ने अमेरिका की तुर्की, इटली और ब्रिटेन में मिसाइल तैनाती के जवाब में गुप्त रूप से क्यूबा में परमाणु मिसाइलें स्थापित करना शुरू कर दिया, जिसका पता 14 अक्टूबर 1962 को अमेरिकी यू-2 जासूसी विमान ने लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने क्यूबा की नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की और सोवियत संघ से मिसाइलें हटाने की मांग की, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। अंततः 28 अक्टूबर 1962 को एक गुप्त समझौते के तहत सोवियत ने मिसाइलें हटाने पर सहमति जताई, जबकि अमेरिका ने क्यूबा पर आक्रमण न करने का वादा किया और बाद में यूरोप से अपनी मिसाइलें भी हटा लीं। इस संकट ने मॉस्को-वाशिंगटन हॉटलाइन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे भविष्य में सीधे संवाद की व्यवस्था बनी। यह घटना शीत युद्ध की सबसे खतरनाक कड़ी मानी जाती है, जिसने परमाणु युद्ध की भयावहता को दुनिया के सामने रखा।