करवा चौथ

करवा चौथ: भारतीय नारी के सौभाग्य का महापर्व

करवा चौथ का पावन पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है, जब विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए सूर्योदय से चन्द्रोदय तक निराहार व्रत रखती हैं। इस दिन स्त्रियाँ प्रातः स्नान कर सुंदर वस्त्र धारण कर हाथों में मेंहदी लगाकर बालू या सफेद मिट्टी की वेदी पर भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रदेव की स्थापना कर पूजन करती हैं। पूजन हेतु शुद्ध घी में आटा सेंककर शक्कर मिलाकर मोदक (लड्डू) का नैवेद्य बनाया जाता है तथा काली मिट्टी और शक्कर की चासनी से करवा (मिट्टी का घड़ा) तैयार किया जाता है। सायंकाल चंद्रमा के उदित होने पर चंद्रदेव का पूजन कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जिसके पश्चात ब्राह्मणों, सुहागिन स्त्रियों और पति के माता-पिता को भोजन कराकर स्वयं भोजन ग्रहण करती हैं। वर्ष 2025 में यह पर्व 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसमें पूजन के समय 'ॐ शिवायै नमः', 'ॐ नमः शिवाय', 'ॐ षण्मुखाय नमः', 'ॐ गणेशाय नमः' और 'ॐ सोमाय नमः' जैसे मंत्रों का जाप किया जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और वैवाहिक बंधन की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।