भारत में बैंकिंग

भारत में आधुनिक बैंकिंग का इतिहास दो सौ साल पुराना है, जिसकी नींव ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने रखी, जब 1806, 1840 और 1843 में क्रमशः बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना हुई; इन तीनों को मिलाकर बने इंपीरियल बैंक का 1955 में राष्ट्रीयकरण कर भारतीय स्टेट बैंक बनाया गया। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1935 में हुई और 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर इसे 'बैंकों का बैंक' घोषित किया गया, जिसके बाद 1959 में आठ क्षेत्रीय बैंकों को भी एसबीआई समूह में शामिल कर लिया गया। स्वतंत्रता के बाद बैंकिंग का विस्तार तेजी से हुआ; 19 जुलाई 1969 को 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों और 15 अप्रैल 1980 को 6 और निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिससे बैंकिंग सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचीं। 1991 में आर्थिक सुधारों के दौरान एम. नरसिंहम समिति की सिफारिशों पर बैंकिंग क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए, जिसमें तरलता अनुपात (SLR) घटाने, ब्याज दरों को बाजार-निर्धारित करने और निर्देशित ऋण कार्यक्रमों को समाप्त करने जैसे सुझाव शामिल थे। आज भारत में राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ-साथ निजी, सहकारी, विदेशी और ग्रामीण बैंकों का विशाल नेटवर्क कार्यरत है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य करता है।