भारतीय राष्ट्रीय मिलिट्री कालेज
राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालिज (आर.आई.एम.सी.) देहरादून की दून घाटी में स्थित एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय है, जो मुख्य रूप से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एन.डी.ए.) और अंततः भारतीय सेना के लिए कैडेटों को तैयार करने वाला एक फीडर संस्थान है। इसकी स्थापना 1922 में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भारतीय युवाओं को सैंडहर्स्ट की रॉयल मिलिट्री अकादमी के लिए प्रशिक्षित करने हेतु की गई थी, और मार्च 1922 में प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवर्ड अष्टम) ने इसका उद्घाटन किया था। यहाँ के पूर्व छात्र 'रिम्कॉलियन्स' कहलाते हैं, जिनमें से कई भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारी बने; प्रथम कैडेट कप्तान हीरा लाल अटल ने बाद में परम वीर चक्र का अभिकल्पन किया, और के.एस. थिमैया जैसे प्रसिद्ध सेनानायक भी यहाँ के छात्र रहे। भारत की स्वतंत्रता के बाद, यह विद्यालय अपनी परंपरा को जारी रखते हुए अब सीधे एन.डी.ए. के लिए फीडर का कार्य करता है, और वर्तमान में लगभग 134 एकड़ में फैले इस परिसर में एक बार में 250 कैडेट्स को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा और मेडिकल परीक्षण के आधार पर दीक्षित किया जाता है। इसके अलावा, यहाँ के भवन ट्यूडर स्थापत्य शैली में बने हैं, जिनमें लकड़ी के दरवाजे, उभरी हुई छतें और आर्क कोलोनेड जैसी विशेषताएँ देखने को मिलती हैं, जो इस ऐतिहासिक संस्थान की भव्यता को दर्शाती हैं।
Source: भारतीय राष्ट्रीय मिलिट्री कालेज — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
Hello from Cyprus ♥️