सरयू नदी

यहाँ प्रस्तुत है सरयू नदी के विषय में एक संक्षिप्त एवं रोचक सारांश:

  • सरयू नदी (जिसे घाघरा भी कहा जाता है) उत्तराखंड के बागेश्वर से निकलकर अयोध्या से होती हुई बिहार के बलिया-छपरा के पास गंगा में मिल जाती है। अपने ऊपरी हिस्से में इसे काली/शारदा कहा जाता है, जो भारत-नेपाल सीमा बनाती है, जबकि निचले हिस्से में स्थानीय लोग इसे सरयू/सरजू पुकारते हैं और इसकी प्रमुख सहायक राप्ती नदी गोरखपुर से होकर इसमें मिलती है।
  • यह एक वैदिक कालीन पवित्र नदी है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद और रामायण में मिलता है—भगवान राम ने विश्वामित्र के साथ इसी नदी से नाव यात्रा की थी। कालिदास के रघुवंशम् और तुलसीदास के रामचरितमानस में भी इसका गुणगान किया गया है, जबकि बौद्ध ग्रंथों में इसे सरभ नाम से जाना गया है।
  • दुर्भाग्यवश, शारदा नहर परियोजना (भारत की सबसे बड़ी सिंचाई प्रणालियों में से एक) के कारण अत्यधिक जल दोहन से इस नदी का प्राकृतिक प्रवाह घट गया है, जिससे इसमें रहने वाली सूँस (गंगा डॉल्फिन) नामक जीव अब विलुप्ति के कगार पर पहुँच गया है।
  • यह नदी अयोध्या, फैजाबाद, जौनपुर, बहराइच, गोंडा जैसे ऐतिहासिक शहरों को सींचती है और इसी के तट पर बसने वाले ब्राह्मण समुदाय को सरयुपारीण कहा गया, जो आज भी इस नदी के नाम से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं।