उत्तराखण्ड की संस्कृति
उत्तराखण्ड की संस्कृति: एक संक्षिप्त परिचय
उत्तराखण्ड की संस्कृति पहाड़ी क्षेत्र की ठंडी जलवायु से गहराई से जुड़ी हुई है, जो यहाँ के रहन-सहन, वेशभूषा और लोक कलाओं को प्रभावित करती है। यहाँ के पारंपरिक घर पत्थरों से बने होते हैं, हालाँकि अब सीमेंट का उपयोग भी बढ़ रहा है, और अधिकतर परिवारों में रात को रोटी तथा दिन में चावल खाने की परंपरा है। स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली गहत, रैंस और भट्ट जैसी दालों का प्रयोग आम है, जबकि पारंपरिक मोटे अनाज मण्डुवा और झुंगोरा का उत्पादन अब कम हो गया है। पहाड़ी लोग अत्यंत परिश्रमी हैं, जिन्होंने पहाड़ों को काटकर सीढ़ीदार खेत बनाए हैं, और कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी लगभग हर घर में होता है। इस राज्य की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है, क्योंकि यहाँ के अधिकांश श्रमिक भी शिक्षित हैं। दीपावली, होली और दशहरा जैसे राष्ट्रीय त्योहारों के अलावा, यहाँ लगभग हर महीने कोई न कोई स्थानीय उत्सव मनाया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं।
Source: उत्तराखण्ड की संस्कृति — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi