श्रीलंका का उच्चतम न्यायालय
श्रीलंका का उच्चतम न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है, जिसकी स्थापना 18 अप्रैल 1801 को ब्रिटिश राजा जॉर्ज तृतीय के शाही आदेश (रॉयल चार्टर) द्वारा की गई थी, और यह संवैधानिक मामलों तथा निचली अदालतों के लिए अंतिम अपीलीय क्षेत्राधिकार रखता है। इस न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित 6 से 10 न्यायाधीश होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान परिषद की सिफारिश पर की जाती है, और वे 65 वर्ष की आयु तक पद पर बने रह सकते हैं। न्यायाधीशों को केवल संसद में महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है; 2015 में न्यायमूर्ति सारथ दे अबू पहले ऐसे न्यायाधीश बने जिन पर आपराधिक अपराध का आरोप लगा। हालाँकि, राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठे, जब पूर्व मुख्य न्यायाधीश शिरनी बंडारनायके को सरकार के खिलाफ फैसले देने के कारण महाभियोग का सामना करना पड़ा। यह न्यायालय कोलंबो के हल्फ्ट्सडोर्प अदालत परिसर में स्थित है, जहाँ न्यायाधीश कार्यवाही के दौरान लाल रंग का चोगा और विशेष औपचारिक अवसरों पर विग पहनते हैं।
Source: श्रीलंका का उच्चतम न्यायालय — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi