अर्धचालक पदार्थ

अर्धचालक वे पदार्थ हैं जिनकी विद्युत चालकता चालकों (जैसे ताँबा) और अचालकों (जैसे काच) के बीच होती है, जिनमें सिलिकॉन, जर्मेनियम और गैलियम आर्सेनाइड प्रमुख हैं। इनमें चालन और संयोजक बैंड के बीच एक बैंड गैप (0 से 6 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट) होता है, और इनका सबसे विशेष गुण यह है कि ताप बढ़ाने पर इनकी चालकता बढ़ती है, जो सामान्य चालकों के बिल्कुल विपरीत है। डोपिंग (नियंत्रित अशुद्धियाँ मिलाने) के माध्यम से इनकी चालकता को बदला जा सकता है, जिससे ही डायोड, ट्रांजिस्टर और आईसी जैसी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों का निर्माण संभव हुआ है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ माना जाने वाला सिलिकॉन सबसे अधिक उपयोग होता है, क्योंकि यह सस्ता, बनाने में आसान और व्यापक तापमान सीमा में कार्य करता है, जबकि गैलियम आर्सेनाइड अतिवेगशाली युक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, सिलिकॉन कार्बाइड नीले एलईडी बनाने में और इंडियम यौगिक (जैसे इंडियम फॉस्फाइड) लेजर डायोड तथा सौर सेल के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये पदार्थ प्रकाश, विद्युत क्षेत्र और दबाव के प्रति संवेदनशील होने के कारण ऊर्जा परिवर्तक और स्विच के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे पूरे इलेक्ट्रॉनिक युग की नींव पड़ी।