1934 नेपाल बिहार भुकम्प

1934 नेपाल-बिहार भूकंप 15 जनवरी 1934 को 8.0 परिमाण का विनाशकारी भूकंप था, जिसने नेपाल और भारत के बिहार राज्य को तबाह कर दिया। इससे ज़मीन जगह-जगह फट गई, इमारतें ढह गईं, और सीतामढ़ी, पटना, दरभंगा, झरिया जैसे क्षेत्रों में भारी क्षति हुई; कई शहरों में एक भी घर नहीं बचा। भूकंप के बाद भीषण अकाल और महामारियों का प्रकोप हुआ, नदियों के मार्ग बदल गए और पीने का पानी गायब हो गया। महात्मा गांधी ने इसे अस्पृश्यता उन्मूलन में विफलता का दंड बताया, जबकि रवींद्रनाथ टैगोर ने इस अंधविश्वासी दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की। राहत कार्यों में श्री कृष्ण सिन्हा और अनुग्रह नारायण सिन्हा जैसे नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।