भारतीय नगरों का वर्गीकरण

भारत सरकार द्वारा शहरों का वर्गीकरण मुख्य रूप से कर्मचारियों को गृह किराया भत्ता (HRA) और आयकर छूट प्रदान करने के लिए किया जाता है, जो उनकी जनसंख्या पर आधारित होता है। 2008 में सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद पुरानी CCA प्रणाली को समाप्त कर दिया गया, और शहरों को अब X (टियर-1), Y (टियर-2) और Z (टियर-3) श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें 8 X शहर और 99 Y शहर शामिल हैं। 2011 की जनगणना के आधार पर, 1 अप्रैल 2014 को पुणे और अहमदाबाद को Y से X श्रेणी में उन्नत किया गया, जबकि 21 अन्य शहरों को Z से Y श्रेणी में स्थानांतरित किया गया। इससे पहले, 1997 के पांचवें वेतन आयोग के तहत चेन्नई, नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई को A-1 श्रेणी में रखा गया था, और बाद में 2007 में हैदराबाद और बैंगलोर को भी इसी श्रेणी में अपग्रेड किया गया था। इसके अतिरिक्त, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी वित्तीय नीतियों के लिए जनसंख्या के आधार पर शहरों को छह अलग-अलग स्तरों (टियर) में वर्गीकृत करता है।