डोमेन नाम प्रणाली

डोमेन नेम सिस्टम (DNS) इंटरनेट की वह प्राथमिक निर्देशिका सेवा है, जो याद रखने में आसान डोमेन नामों (जैसे www.example.com) को कंप्यूटर द्वारा पढ़े जाने वाले संख्यात्मक IP पतों (जैसे 208.77.188.166) में बदलती है। इसे अक्सर इंटरनेट की "फ़ोन बुक" कहा जाता है, क्योंकि यह मानव-सुलभ नामों को मशीनों के लिए आवश्यक बाइनरी पहचान से जोड़ती है, जिससे उपयोगकर्ता जटिल IP पते याद रखने से मुक्त हो जाते हैं। यह एक श्रेणीबद्ध (hierarchical) और वितरित (distributed) प्रणाली है, जिसमें आधिकारिक नाम सर्वर अपने-अपने डोमेन की जिम्मेदारी संभालते हैं, जिससे यह त्रुटि-सहनशील बनती है और केंद्रीय रजिस्टर की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। DNS केवल वेबसाइटों के लिए ही नहीं, बल्कि ईमेल सर्वरों की सूची जैसी अन्य जानकारी भी संग्रहीत करता है, और यह वर्ल्ड वाइड वेब के हाइपरलिंक्स को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रोटोकॉल को 1980 के दशक के आरंभ में विकसित किया गया था और इसे इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स (IETF) द्वारा परिभाषित किया गया, जो आज के इंटरनेट की रीढ़ है।