भास्कर प्रमेयिका
भास्कर प्रमेयिका (Bhaskara's Lemma) एक महत्वपूर्ण गणितीय सर्वसमिका है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से प्राचीन भारतीय चक्रवाल विधि (Chakravala method) में किया जाता है। यह सर्वसमिका कहती है कि यदि (Nx^2 + k = y^2) है, तो (N\left(\frac{mx+y}{k}\right)^2 + \frac{m^2-N}{k} = \left(\frac{my+Nx}{k}\right)^2) भी सत्य होगा, जहाँ (m, x, y, N) पूर्णांक हैं और (k) एक शून्येतर पूर्णांक है। इसकी उपपत्ति समीकरण के दोनों पक्षों को (m^2 - N) से गुणा करने, कुछ पदों को जोड़ने और गुणनखंड करने के बाद (k^2) से भाग देने पर प्राप्त होती है। यह प्रमेयिका केवल पूर्णांकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक और समिश्र संख्याओं के लिए भी सत्य है, और जब तक (k) और (m^2 - N) शून्य नहीं हैं, यह दोनों दिशाओं में लागू होती है। इसका नाम महान गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वितीय के नाम पर रखा गया है, और यह द्विघात समीकरणों (जैसे पेल समीकरण) को हल करने की चक्रवाल विधि की रीढ़ मानी जाती है। आधुनिक शोधकर्ताओं जैसे सी. ओ. सेलेनियस ने इसकी तार्किक व्याख्या की है, जो दर्शाती है कि यह विधि यूरोपीय गणित से कई शताब्दियों पहले विकसित हो चुकी थी।
Source: भास्कर प्रमेयिका — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi