कर्नूल

कर्नूल: आंध्र प्रदेश का ऐतिहासिक शहर

कर्नूल आंध्र प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है, जो तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा है और इसे अक्सर "रायलसीमा का प्रवेश द्वार" कहा जाता है। यह शहर 1 अक्टूबर 1953 से 31 अक्टूबर 1956 तक आंध्र राज्य की राजधानी रहा, जिसके बाद राजधानी हैदराबाद स्थानांतरित कर दी गई। 2011 की जनगणना के अनुसार, यह लगभग 4.6 लाख की आबादी के साथ राज्य का पाँचवाँ सबसे बड़ा शहर है।

शहर का नाम "कंदनवोलू" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "तेल लगाना" — प्राचीन काल में बैलगाड़ी चालक नदी पार करने से पहले पहियों में तेल लगाने के लिए यहाँ रुकते थे। 11वीं शताब्दी में बसा यह नगर प्राचीन समय में हीरे की खानों के लिए प्रसिद्ध था और विजयनगर साम्राज्य, बीजापुर सुल्तानों तथा मुगल शासकों के अधीन रहा। औरंगज़ेब के समय यह मुगल साम्राज्य का हिस्सा बना और बाद में निज़ाम हैदराबाद ने इसे अपने राज्य में मिला लिया।

1690 से 1839 तक यहाँ नवाबों का शासन रहा, जिनमें अंतिम स्वतंत्र शासक नवाब ग़ुलाम रसूल खान थे। स्वतंत्रता के बाद शाही वंशज पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका में बस गए, जबकि कुछ ने भारत में रहना चुना। 1956 में तेलंगाना क्षेत्र के आंध्र प्रदेश में विलय के बाद, बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण राजधानी कर्नूल से हैदराबाद स्थानांतरित कर दी गई, जो पहले से ही एक सुस्थापित शहर था।