नीम करौली बाबा

नीम करौली बाबा (मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा) बीसवीं सदी के सबसे महान संतों में गिने जाते हैं, जिनका जन्म 1900 में उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद जिले के अकबरपुर गाँव में हुआ था। उन्हें 'नीम करौली' नाम फर्रुखाबाद के नीम करौर गाँव से जुड़ी एक चमत्कारी घटना के कारण मिला, जब बिना टिकट यात्रा करने पर टीटीई ने उन्हें उतार दिया, लेकिन बाबा के उतरते ही ट्रेन नहीं चली और क्षमा मांगने तथा स्टेशन बनाने के वादे पर ही वह आगे बढ़ी। 11 वर्ष की आयु में विवाह के बाद उन्होंने गृह त्याग किया, पर पिता के कहने पर लौटकर गृहस्थ जीवन बिताया और दो पुत्रों तथा एक पुत्री के पिता बने; माना जाता है कि 17 वर्ष की आयु तक उन्हें सारा ज्ञान प्राप्त हो गया था और भगवान हनुमान उनके गुरु थे। उन्होंने भारत के कई स्थानों का भ्रमण किया और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों (जैसे गंजम में हनुमानजी) से जाने गए, तथा कैंची, वृन्दावन, ऋषिकेश, दिल्ली और अमेरिका के ताओस (न्यू मैक्सिको) में उनके आश्रम स्थापित हैं। उनके प्रमुख शिष्यों में आध्यात्मिक गुरु राम दास (बी हियर नाउ के लेखक) शामिल हैं, और कैंची मन्दिर में प्रतिवर्ष 15 जून को उनका विशाल वार्षिक समारोह मनाया जाता है। 11 सितंबर 1973 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी शिक्षाएँ और चमत्कार आज भी लाखों भक्तों को प्रेरित करते हैं।