शराबीपन

शराबीपन (शराब निर्भरता) एक निष्क्रिय कर देने वाला नशीला विकार है, जिसे चिकित्सा की दृष्टि से एक इलाज़ योग्य बीमारी माना जाता है, जिसमें व्यक्ति स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसान के बावजूद शराब पीने पर नियंत्रण नहीं रख पाता। इसके जोखिम कारकों में सामाजिक वातावरण, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य, आनुवंशिकी, आयु और लिंग शामिल हैं; लंबे समय तक पीने से मस्तिष्क में सहनशीलता और शारीरिक निर्भरता जैसे बदलाव होते हैं, जिससे शराब बंद करने पर वापसी सिंड्रोम उत्पन्न होता है। शराब शरीर के हर अंग को क्षतिग्रस्त करती है, जिससे कई चिकित्सा और मानसिक विकार होते हैं, और प्रश्नावली आधारित जांच से इसका पता लगाया जाता है। उपचार में बेंज़ोडायज़ेपींस जैसी दवाओं से विषहरण और फिर समूह चिकित्सा या स्व-सहायक समूह शामिल हैं; महिलाएं पुरुषों की तुलना में शराब के हानिकारक प्रभावों और सामाजिक कलंक के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग 140 मिलियन शराबी हैं, और 19वीं सदी में इसे 'मदिरापान' कहा जाता था, जिसे बाद में 'शराबीपन' शब्द से बदल दिया गया। राष्ट्रीय शराबीपन एवं नशा निर्भरता परिषद् और अमेरिकी व्यसन औषधि समाज इसे एक प्राथमिक, गंभीर रोग के रूप में परिभाषित करते हैं, जिसमें पीने पर कमज़ोर नियंत्रण और विकृत सोच शामिल है।