थारवथ अम्मालु अम्मा

थरावथ अम्मालु अम्मा: मलयालम साहित्य की अग्रणी लेखिका

थरावथ अम्मालु अम्मा (1873-1936) मलयालम भाषा की प्रसिद्ध लेखिका और अनुवादक थीं, जिन्होंने संस्कृत, तमिल और अंग्रेजी से कई महत्वपूर्ण रचनाओं का मलयालम में अनुवाद किया। उनका सबसे उल्लेखनीय योगदान 1914 में लिखा गया उपन्यास 'कमलाभाई अथवा लक्ष्मीविलासथिले कोलापथकम' है, जो मलयालम साहित्य में किसी महिला द्वारा लिखा गया पहला जासूसी उपन्यास माना जाता है। वे संस्कृत, तमिल और मलयालम तीनों भाषाओं में पारंगत थीं और उन्होंने बुद्ध की जीवनी 'द लाइट ऑफ एशिया' का 'बुद्ध गाथा' के रूप में अनुवाद किया।

अम्मालु अम्मा ने तीन विवाह किए और कई संतानों के निधन के बाद केवल दो पुत्रियाँ ही जीवित बचीं। वे एक प्रबल नारीवादी थीं और उन्होंने महिलाओं की साहित्यिक रुचि को पुरुषों के बराबर महत्व देने का आह्वान किया। उन्होंने त्रावणकोर के निर्वासित पत्रकार स्वदेशाभिमानी रामकृष्ण पिल्लई और उनके परिवार को शरण देकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। कोचीन के महाराजा उन्हें सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार "साहित्य साखी" देना चाहते थे, परंतु उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। 6 जून 1936 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी मलयालम साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।