लखनऊ का रोटी बाजार
लखनऊ के अवधी व्यंजन अपनी समृद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं, और इसका जीवंत उदाहरण अकबरी गेट से नक्खास चौकी तक फैला रोटी बाजार है, जहाँ लगभग 15 दुकानों में शीरमाल, नान, खमीरी रोटी, रूमाली रोटी और कुल्चा जैसी कई रोटियाँ सुबह 9 से रात 9 बजे तक मिलती हैं। मोहर्रम और रमजान के महीने में इन रोटियों की मांग बढ़ जाती है, जिससे कारीगरों को 12 के बजाय 18 घंटे काम करना पड़ता है, और बिक्री का समय शाम 4 बजे से सुबह 4 बजे तक चलता है। सबसे अधिक बिकने वाली शीरमाल मैदा, दूध और घी से बनती है, जिसे तंदूर में पकाकर खुशबू के लिए घी लगाया जाता है; इसका वजन 110 से 200 ग्राम तक होता है और यह 4 से 7 रुपये प्रति पीस बिकती है, जबकि देशी घी और केसर से बनी स्पेशल शीरमाल 16 से 20 रुपये में मिलती है। अन्य विशेष रोटियों में बाकरखानी (मेवे और मलाई वाली, जो चाय के साथ आनंद बढ़ाती है) और नान (शादी-ब्याह के लिए मैदा, दूध, दही, घी और रवा से बनाई जाने वाली) शामिल हैं, हालांकि इनकी मांग अब कम हो गई है। लखनऊ में तंदूरी परांठा की खोज की गई, जिसे नर्म रखने के लिए पानी की छीटें देकर घी लगाया जाता है, और ईरान से आए कुलचे को यहाँ के कारीगरों ने 'गिलामी कुलचा' (दो भाग वाला) बनाकर बदला, जिसे हाजी जुबैर अहमद के परदादा ने तैयार किया था; यह 5 रुपये प्रति पीस है और नाहरी के साथ गर्मागर्म खाने में ही इसका मज़ा है।
Source: लखनऊ का रोटी बाजार — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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