जम्मू और कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस

जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (JKN) 1932 में शेख अब्दुल्ला द्वारा स्थापित एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, जिसे 1939 में बदलकर 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' नाम दिया गया। इसने 1947 में भारत में विलय का समर्थन किया और 1951 में संविधान सभा की सभी 75 सीटें जीतकर दशकों तक राज्य की राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा। पार्टी का नेतृत्व शेख अब्दुल्ला के बाद उनके पुत्र फारूक अब्दुल्ला और पोते उमर अब्दुल्ला ने संभाला, जबकि 1941 में गुलाम अब्बास के नेतृत्व में एक गुट अलग होकर पाकिस्तान समर्थक मुस्लिम कॉन्फ्रेंस बना लिया। लेख में 1989-90 के दौरान कश्मीरी पंडितों के दुखद पलायन का भी जिक्र है, जिसमें आतंकी हमले, हत्याएं और धमकियां शामिल थीं, जिसके कारण उन्हें घाटी छोड़नी पड़ी। साथ ही, इसमें महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं के विवादास्पद बयानों और आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव को भी राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता का कारण बताया गया है।