अब्बास इब्न अली

अल-अब्बास इब्न अली, जिन्हें 'कमर बनी हाशिम' (हाशिम का चाँद) कहा जाता है, इमाम अली और फातिमा इब्ने उम्मुल बनिन के पराक्रमी पुत्र थे, जिनका जन्म 647 ई. में हुआ और 10 अक्टूबर 680 ई. को अशूरा के दिन कर्बला में वीरगति प्राप्त की। मात्र 11 वर्ष की आयु में सिफिन की लड़ाई (657 ई.) में अपने पिता के कपड़े पहनकर लड़ते हुए उन्होंने ऐसा शौर्य दिखाया कि दुश्मन उन्हें ग़लती से इमाम अली समझ बैठे, जिसके बाद पिता ने प्यार से उन्हें यह अद्भुत खिताब दिया। कर्बला के मैदान में वे अपने भाई इमाम हुसैन के सबसे वफादार साथी बने, जब अत्याचारी खलीफा यज़ीद ने हुसैन से निष्ठा मांगी, लेकिन इस्लाम विरोधी आचरण के कारण हुसैन ने इसे अस्वीकार कर दिया और कूफा के धोखेबाज़ लोगों ने उन्हें घेर लिया। अपने भाई और पैगंबर के परिवार की रक्षा करते हुए अब्बास ने अद्वितीय वीरता दिखाई, और उन्हें कर्बला में 'हज़रत अब्बास का रोज़ा' में दफनाया गया, जहाँ आज भी शिया मुसलमान उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। उनका प्रसिद्ध युद्ध-घोड़ा 'उकाब' (ईगल), जिसे पहले 'मुर्तजिज' (गड़गड़ाहट) कहा जाता था, पैगंबर मुहम्मद से जुड़ा बताया जाता है, जो उनकी विशिष्ट योद्धा पहचान और बहादुरी का प्रतीक बन गया।