हिंदू-जर्मन षड्यंत्र
हिन्दू-जर्मन षड्यंत्र (1914-1917)
हिन्दू-जर्मन षड्यंत्र प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान (1914-1917) ब्रिटिश राज के विरुद्ध भारत में अखिल भारतीय विद्रोह आरम्भ करने की एक महत्वपूर्ण योजना थी, जिसमें भारतीय राष्ट्रवादी संगठनों के साथ-साथ जर्मनी का विदेश विभाग, अमेरिका स्थित गदर पार्टी, जर्मनी की बर्लिन कमिटी और आयरलैंड के रिपब्लिकन शामिल थे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पंजाब से सिंगापुर तक ब्रिटिश भारतीय सेना में असंतोष फैलाकर फरवरी 1915 में विद्रोह करना था, परन्तु ब्रिटिश गुप्तचर सेवा ने गदर आंदोलन में सेंध लगाकर इसे विफल कर दिया। इस षड्यंत्र का पता लगाने के लिए ब्रिटिश गुप्तचर पूरे विश्व में सक्रिय थे, और 1917 में अमेरिका में एन्नी लार्सन घटनाक्रम के बाद अमेरिकी गुप्तचर संस्थाओं ने इसके प्रमुख लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के दूरगामी परिणाम हुए, जिससे ब्रिटिश राज को भारत सम्बन्धी नीतियों में सुधार करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इसी प्रकार के प्रयास द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी हुए, जब सुभाष चन्द्र बोस ने जर्मनी में भारतीय सेना (Indische Legion) और जापान में आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया। इस षड्यंत्र की नींव 1905 में श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा लंदन में स्थापित इंडिया हाउस और 1913 में हर दयाल के नेतृत्व में बनी गदर पार्टी जैसे संगठनों से जुड़ी थी, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
Source: हिंदू-जर्मन षड्यंत्र — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi