चारा घोटाला

चारा घोटाला स्वतंत्र भारत के बिहार राज्य का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था, जिसमें पशुओं के चारे के नाम पर सरकारी खजाने से लगभग 950 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र जैसे नेताओं के नाम शामिल थे। यह मामला 1996 में सामने आया, जिसके बाद सीबीआई जांच शुरू हुई और 1997 में लालू यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा तथा उन्हें जेल भी जाना पड़ा। लगभग 17 साल चले इस मुकदमे में 3 अक्टूबर 2013 को सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू को 5 साल की कैद और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई, और फरवरी 2022 में डोरंडा कोषागार मामले में उन्हें फिर से 5 साल की सजा हुई। इस घोटाले के कारण लालू और जदयू नेता जगदीश शर्मा को लोकसभा से अयोग्य ठहराया गया, जिससे लालू भारतीय इतिहास में संसद की सदस्यता गंवाने वाले पहले सांसद बने और अब वे 11 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस घोटाले की गूंज अमेरिका और ब्रिटेन तक पहुंची, जिससे भारत की राजनीति बदनाम हुई, और उच्चतम न्यायालय ने दोषी सांसदों को बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मीडिया की भूमिका भी अहम रही।