सोनपुर मेला
बिहार के सोनपुर में गंडक नदी के तट पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगने वाला सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है, जिसे 'हरिहर क्षेत्र मेला' भी कहा जाता है। इस मेले का ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है; चन्द्रगुप्त मौर्य, मुगल सम्राट अकबर और वीर कुँवर सिंह ने यहाँ हाथियों की खरीद की थी, और मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर इसे हाजीपुर से सोनपुर स्थानांतरित किया गया था। आधुनिक समय में यह मेला केवल पशुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऑटो एक्स्पो, रेलग्राम (टॉय ट्रेन), और डिजिटल मानचित्र स्टॉल जैसी सुविधाएँ शामिल हैं, साथ ही विदेशी पर्यटकों के लिए स्विस कॉटेज भी बनाए जाते हैं। हालाँकि, पशु व्यापार में गिरावट आई है - 2001 में 92 हाथी आए थे, जबकि 2017 में केवल 3 हाथी ही प्रदर्शन के लिए लाए गए थे, और 2017 का मेला 32 दिनों (2 नवंबर से 3 दिसंबर) तक चला था। सैकड़ों वर्षों के इतिहास में पहली बार, कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में यह विश्व प्रसिद्ध मेला नहीं लगा, जो इसकी अनूठी परंपरा में एक ऐतिहासिक बदलाव है। इस मेले में नौटंकी, नौका दौड़ और दंगल जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जो इसे आस्था और मनोरंजन का अद्भुत संगम बनाते हैं।
Source: सोनपुर मेला — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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