कुमाऊँनी भाषा

कुमाउनी भाषा उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र की प्रमुख भाषा है, जिसे 26 लाख से अधिक लोग बोलते हैं और यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है (आईएसओ कोड: kfy)। यह अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर जिलों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों और नेपाल के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है, जिसकी कई क्षेत्रीय बोलियाँ हैं। पर्वतीय राज्य मंच द्वारा 1 सितंबर को कुमाउनी भाषा दिवस मनाने का आह्वान किया गया है, जो 1994 में खटीमा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति में है। युनेस्को ने इस भाषा को 'असुरक्षित' श्रेणी में रखा है, क्योंकि पलायन, नगरीकरण और हिन्दी के बढ़ते प्रभाव के कारण नई पीढ़ी इसे कम बोल रही है। हालाँकि, इसकी एक समृद्ध लिखित परंपरा है, और सुमित्रानंदन पंत, गुमानी पंत तथा शैलेश मटियानी जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों ने इस भाषा को समृद्ध किया है।