गुजराती लिपि
गुजराती लिपि एक आबूगीदा है जिसका उपयोग गुजराती, कच्छी और अन्य भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है, और यह भारत की एक आधिकारिक लिपि है, जिसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें देवनागरी की तरह शिरोरेखा (ऊपर की रेखा) नहीं होती। यह लिपि नागरी (देवनागरी) से व्युत्पन्न हुई है और 10वीं से 19वीं शताब्दी तक तीन अलग-अलग चरणों में विकसित हुई, जिसमें अंतिम चरण में तेज और आसान लेखन के लिए शिरोरेखा को पूरी तरह त्याग दिया गया। इस लिपि का सबसे पुराना ज्ञात दस्तावेज 1591-92 की 'आदि पर्व' की हस्तलिखित पांडुलिपि है, और यह पहली बार 1797 के एक विज्ञापन में मुद्रित हुई थी। 19वीं शताब्दी तक इसका उपयोग मुख्यतः पत्र-व्यवहार और हिसाब-किताब (जिसे शराफी या वाणियाशाई कहा जाता था) के लिए होता था, जबकि साहित्य और अकादमिक लेखन के लिए देवनागरी का उपयोग किया जाता था; बाद में जैन समुदाय ने भी धार्मिक ग्रंथों की प्रतिलिपि बनाने के लिए इसी लिपि को अपना लिया। आधुनिक युग में, इस लिपि को अक्टूबर 1991 में यूनिकोड मानक (संस्करण 1.0) के साथ जोड़ा गया, जिसका यूनिकोड ब्लॉक U+0A80–U+0AFF है, जिससे यह डिजिटल दुनिया में भी सुगमता से उपयोग हो रही है।
Source: गुजराती लिपि — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi