गणेशप्रसाद वर्णी
क्षुल्लक गणेशप्रसाद वर्णी (1874-1961) आधुनिक भारत के एक प्रमुख दिगम्बर जैन विद्वान थे, जिन्होंने जैन शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के हंसेरा गाँव में जन्मे वर्णी ने बचपन से ही कठोर व्रत लिए और उच्च शिक्षा के लिए भूख और अपमान सहते हुए जयपुर, मुंबई और वाराणसी जैसे स्थानों में अध्ययन किया। मात्र एक रुपये के दान से 64 पोस्टकार्ड भेजकर धन जुटाकर उन्होंने 1905 में वाराणसी में प्रसिद्ध स्याद्वाद महाविद्यालय की स्थापना की, जिसने कई प्रभावशाली जैन विद्वानों को तैयार किया। उन्होंने सागर में गणेश दिगम्बर जैन संस्कृत विद्यालय की स्थापना में मदद की और पं. मोतीलाल नेहरू के सहयोग से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में जैन अध्ययन शुरू करवाया, साथ ही 1926 में खतौली में कुन्द कुन्द जैन कॉलेज की स्थापना में भी योगदान दिया। उनके द्वारा स्थापित संस्थानों ने सहजानन्द और जिनेन्द्र वर्णी जैसे विद्वानों को गहराई से प्रभावित किया, और उनकी जन्म शताब्दी (1975) में 'वर्णी दर्शन' नामक ग्रंथ संकलित किया गया, जो उनकी स्थायी विरासत को दर्शाता है।
Source: गणेशप्रसाद वर्णी — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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