ज्वार-भाटा
ज्वार-भाटा पृथ्वी के महासागरों में जल स्तर का नियमित उतार-चढ़ाव है, जो मुख्यतः चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है। न्यूटन के नियम के अनुसार, चंद्रमा का ज्वार-उत्पादक बल सूर्य से दोगुना है क्योंकि वह पृथ्वी के अधिक निकट है। अमावस्या और पूर्णिमा के दिन जब तीनों आकाशीय पिंड एक सीध में होते हैं तो उच्च ज्वार आता है, जबकि सप्तमी/अष्टमी को समकोण बनाने पर निम्न ज्वार आता है। पृथ्वी पर हर 12 घंटे 26 मिनट में ज्वार आता है, लेकिन इंग्लैंड के साउथेम्पटन में यह दिन में चार बार आता है। यह घटना मत्स्य पालन, नौ-परिवहन और ज्वारीय ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, हालांकि छोटे जल निकायों (नदियों, झीलों) में इसका प्रभाव नगण्य होता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव बड़े जल क्षेत्र में ही व्यापक रूप से दिखाई देता है।
Source: ज्वार-भाटा — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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