मराठी चलचित्र

मराठी सिनेमा: भारत का सबसे पुराना क्षेत्रीय फिल्म उद्योग

मराठी सिनेमा भारत के सबसे पुराने क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों में से एक है, जो मुंबई में स्थित है। पहली मराठी बोलती फिल्म 'अयोध्याचे राजा' 1932 में प्रभात फिल्म्स द्वारा बनाई गई, जो भारत की पहली सवाक् फिल्म 'आलम आरा' के ठीक एक वर्ष बाद आई। दादा साहेब फाल्के की पहली भारतीय फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' में अधिकतर मराठी कलाकार शामिल थे, और 1919 में बाबुराव पेंटर ने महाराष्ट्र फिल्म कंपनी की स्थापना कर 'सैरंध्री' (1920) जैसी ऐतिहासिक फिल्में बनाईं। प्रभात फिल्म्स की 'संत तुकाराम' (1937) वेनिस फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी। वी. शांताराम, मास्टर विनायक, दादा कोंडके जैसे कलाकारों ने मराठी सिनेमा के स्वर्ण युग को संवारा, जबकि 2004 में 'श्वास' ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर और ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनकर नई पहचान दिलाई। आज महाराष्ट्र सरकार मराठी फिल्मों को 15-30 लाख रुपये का अनुदान देती है, और 'देऊळ' जैसी फिल्मों ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर इस उद्योग की प्रतिष्ठा बढ़ाई है।