एनएसईएल केस

एनएसईएल केस राष्ट्रीय स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) में 2013 में हुए भुगतान डिफॉल्ट से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला है, जिसके बाद फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन (FMC) के निर्देश पर जुलाई 2013 में एक्सचेंज को बंद कर दिया गया था। इस घोटाले में दलालों ने ग्राहकों को निश्चित रिटर्न का आश्वासन देकर NSEL के उत्पाद बेचे, जबकि डिफॉल्टरों ने नकली वेयरहाउस रसीदें बनाकर करोड़ों रुपये हड़प लिए, जिससे लगभग 13,000 व्यापारिक ग्राहक प्रभावित हुए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, और बर्खास्त CEO अंजनी सिन्हा ने पहले जिम्मेदारी स्वीकारी और फिर अपना बयान वापस ले लिया। इस मामले में 30 जुलाई 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और दो अन्य अधिकारियों को 63 मून्स टेक्नोलॉजीज़ द्वारा दायर 10,000 करोड़ रुपये के क्षति सूट के सिलसिले में तलब किया। गौरतलब है कि 18 मई 2005 को स्थापित एनएसईएल का उद्देश्य कृषि उपज के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना था, लेकिन खराब नियामकीय सिफारिशों और वित्तीय प्रबंधन की विफलता ने इसे भारत के सबसे बड़े कमोडिटी घोटालों में से एक बना दिया।