औद्योगीकरण

औद्योगीकरण एक सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया है जो मानव-समूह की स्थिति बदल देती है, जिसमें उद्योग-धंधों का बोलबाला होता है तथा बड़े पैमाने पर ऊर्जा-खपत, उत्पादन और धातुकर्म इसकी विशेषताएँ हैं। यह आधुनिकीकरण का अंग होने के साथ-साथ नगरीकरण का भी एक महत्वपूर्ण साधन है, क्योंकि नगरों के विकास और औद्योगीकरण के प्रसार दोनों ही एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका के कृषि-प्रधान देशों में तृतीयक क्षेत्र का योगदान द्वितीयक क्षेत्र से अधिक होता है, जबकि दक्षिण अमेरिका में औद्योगीकरण काफी हद तक पूरा हो चुका है और एशिया इसका एक बहुत ही भिन चित्र प्रस्तुत करता है। यह प्रक्रिया औद्योगिक क्रांति, विऔद्योगीकरण और कार्य के विभाजन जैसी अवधारणाओं से गहराई से जुड़ी है, जिसे समझने के लिए एरिक हॉब्सबॉम और केनेथ पोमरानज़ जैसे इतिहासकारों के कार्य भी महत्वपूर्ण हैं।