भारत का विदेशी ऋण

यहाँ भारत के विदेशी ऋण पर एक संक्षिप्त लेकिन जानकारीपूर्ण सारांश प्रस्तुत है:

  • परिभाषा और प्रकाशन: भारत का विदेशी ऋण विदेशी बैंकों, सरकारों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से लिया गया वह हिस्सा है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय द्वारा तिमाही आधार पर प्रकाशित किया जाता है। पहली दो तिमाहियों के आँकड़े RBI जारी करता है, जबकि अंतिम दो तिमाहियों का डेटा वित्त मंत्रालय संकलित करता है, साथ ही सरकार हर साल एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करती है।
  • ऋण की संरचना: भारत के विदेशी ऋण में दीर्घकालिक ऋण (एक वर्ष से अधिक परिपक्वता) का प्रभुत्व है, जिसे मार्च 2021 तक सात प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
  • मुद्रा संरचना (डॉलर का दबदबा): मार्च 2020 तक देश का सबसे बड़ा विदेशी ऋण 53.7% अमेरिकी डॉलर में था, जो वैश्विक वित्तीय बाजार पर भारत की निर्भरता को दर्शाता है।
  • अन्य प्रमुख मुद्राएँ: शेष ऋण में भारतीय रुपया (31.9%) का महत्वपूर्ण स्थान है, जबकि जापानी येन (5.6%), विशेष आहरण अधिकार (4.5%), यूरो (3.5%) और अन्य मुद्राएँ (0.8%) मिलकर बाकी हिस्सा बनाती हैं।
  • महत्व: यह डेटा नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के लिए देश की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक जोखिमों का आकलन करने में मदद करता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक योजना के लिए आवश्यक है।