लद्दाख का इतिहास
लद्दाख का इतिहास 9वीं शताब्दी से पहले अस्पष्ट है, लेकिन लगभग 950 ईस्वी में तिब्बती साम्राज्य के पतन के बाद यह तिब्बती शाही परिवार की शाखाओं द्वारा एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित हुआ। प्राचीन काल में यहाँ दर्दी (ब्रोकपा) जनजाति निवास करती थी, जो सोने के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थी, और हेरोडोटस, प्लिनी तथा चीनी भिक्षु जुआनज़ांग (634 ई.) ने इसका उल्लेख किया है। पहली शताब्दी में खारोष्ठी शिलालेखों से पता चलता है कि यह क्षेत्र कुषाण साम्राज्य का हिस्सा था। 7वीं शताब्दी में तिब्बत ने झांगझुंग को अधीन कर लिया और 653 ई. में यहाँ तिब्बती आयुक्त नियुक्त हुआ, जिससे तिब्बती शासन स्थापित हुआ; उस दौर के कोरियाई भिक्षु हाईको ने लद्दाख को बौद्ध धर्म के प्रति आस्थावान लेकिन गैर-तिब्बती मूल का क्षेत्र बताया। 747 ई. में चीनी सेनापति गाओ झियान्झी ने तिब्बतियों को अस्थायी रूप से पराजित किया, लेकिन 751 ई. के तलास युद्ध में चीनी हार के बाद तिब्बती प्रभाव फिर से बढ़ गया, जो आगे कई शताब्दियों तक कायम रहा। इस प्रकार, लद्दाख प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से कुषाण, तिब्बत और चीनी जैसी बड़ी शक्तियों के बीच एक प्रमुख सेतु एवं विवादित क्षेत्र रहा है।
Source: लद्दाख का इतिहास — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi
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