ऋषभदेव
ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे, जिनका जन्म अयोध्या में राजा नाभिराज और रानी मरुदेवी के घर हुआ था। उनके सबसे बड़े पुत्र भरत प्रथम चक्रवर्ती सम्राट बने, जिनके नाम पर ही इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा, जबकि दूसरे पुत्र बाहुबली भी एक महान राजा हुए। उन्होंने समाज को असि (हथियार), मसि (लेखन), कृषि, वाणिज्य, शिल्प और कला जैसी छह कलाओं का उपदेश दिया और अपनी पुत्रियों ब्राह्मी तथा सुन्दरी को क्रमशः लिपि और अंक विद्या का ज्ञान दिया। लगभग 1,000 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई और अंततः कैलाश पर्वत से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उनकी स्मृति में आज भी मध्य प्रदेश के बावनगजा में 84 फुट और महाराष्ट्र के मांगीतुंगी में 108 फुट की विशाल प्रतिमाएँ स्थित हैं, तथा राजस्थान का ऋषभदेव शहर भी उन्हीं के नाम पर बसा हुआ है।
Source: ऋषभदेव — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi