नील विद्रोह
नील विद्रोह का सारांश
नील विद्रोह 1859 में बंगाल के किसानों द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख अहिंसक आंदोलन था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने बराबर भाग लिया। यह विद्रोह यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों को जबरन नील की खेती कराने के खिलाफ था, जिसकी जड़ें आधी सदी पुराने नील कृषि अधिनियम में थीं। 1860 तक बंगाल में नील की खेती लगभग ठप हो गई, जिसके बाद सरकार ने एक आयोग गठित किया। बीसवीं सदी में यह आंदोलन बिहार के चंपारन क्षेत्र में फिर भड़का, जहाँ 1917-18 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रसिद्ध चंपारन सत्याग्रह हुआ। गांधी जी ने राजेन्द्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी आदि के साथ मिलकर 'तिनकठिया' प्रथा (जिसमें किसानों को 20 कट्ठे में से 3 कट्ठे पर नील उगाना पड़ता था) के खिलाफ आवाज उठाई। अंततः ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और यह दमनकारी प्रथा समाप्त कर दी गई, जिससे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया।
Source: नील विद्रोह — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi