कृष्णचन्द्र राय

कृष्णचंद्र राय (1710-1783) नदिया के महाराजा थे, जिन्हें नदिया राजपरिवार का सबसे महान व्यक्ति माना जाता है और बांग्ला साहित्य, संस्कृति एवं इतिहास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। संस्कृत और फारसी के विद्वान तथा संगीत प्रेमी होने के साथ-साथ वे रामप्रसाद सेन, भरतचंद्र राय (जिन्होंने उनके दरबार में 'अन्नदामंगल' की रचना की) और गोपाल भांड़ जैसे प्रख्यात बंगाली हस्तियों के संरक्षक थे, और उन्हीं के शासनकाल में कृष्णनगर के विश्व प्रसिद्ध मिट्टी के बर्तनों का निर्माण शुरू हुआ। कूटनीति में निपुण कृष्णचंद्र ने नवाब सिराज-उद-दौला के विरुद्ध अंग्रेजों का साथ दिया, जिसके कारण अगले नवाब मीर कासिम ने उन्हें कैद कर लिया, परंतु अंग्रेजों के हस्तक्षेप से रिहा होने के बाद कंपनी सरकार ने उनकी वफादारी के लिए उन्हें 'महाराजा' की उपाधि से सम्मानित किया। उन्हें बंगाल में जगद्धात्री पूजा और नबद्वीप के शाक्तरास के प्रचलन का श्रेय दिया जाता है। किंवदंती है कि 1754 में अलीवर्दी खान की जेल में रहते हुए उन्होंने सपने में चार भुजाओं वाली लाल बालों वाली देवी को देखा, जिसके बाद उन्होंने अगले कार्तिक माह की शुक्ल नवमी को जगद्धात्री पूजा का आरंभ किया, जो बाद में बंगाल की एक प्रमुख परंपरा बन गई।