उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की स्थापना 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से राज्य अलग होने के बाद नैनीताल (कुमाऊं क्षेत्र) में हुई थी, जो अपनी ऐतिहासिक इमारत के लिए जाना जाता है, जिसे 1900 में सैंटोनी मैकडोनाल्ड ने बनवाया था। स्थापना के समय इसमें केवल 7 स्वीकृत न्यायाधीश थे, जिन्हें 2003 में बढ़ाकर 9 कर दिया गया, और पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक देसाई थे। इस न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सरोश होमी कपाड़िया और जगदीश सिंह खेहर बाद में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने, जो इसकी प्रतिष्ठा को दर्शाता है। वर्तमान में, 4 फरवरी 2024 से न्यायमूर्ति रितु बाहरी इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं, जबकि इससे पहले मनोज कुमार तिवारी 27 अक्टूबर 2023 से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। 2007 में यहां एक विशाल मुख्य न्यायाधीश न्यायालय ब्लॉक और वकीलों के कक्षों का निर्माण कर न्यायालय का आधुनिकीकरण किया गया, जिससे इसकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
Source: उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi