धीरूभाई अंबानी

धीरूभाई अंबानी (28 दिसंबर 1932 – 6 जुलाई 2002) की कहानी 'चिथड़े से धनी बनने' (rags-to-riches) की एक प्रेरणादायक गाथा है, जिन्होंने मुंबई में अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की स्थापना की और भारतीय व्यापार जगत का नक्शा ही बदल दिया।

गुजरात के चोरवाड़ में एक सामान्य परिवार में जन्मे धीरूभाई ने केवल हाईस्कूल तक पढ़ाई की, और 16 साल की उम्र में कमाई के लिए यमन के एडन चले गए, जहाँ उन्होंने एक पेट्रोल पंप पर महज ₹300 प्रति माह की नौकरी की। 1958 में भारत लौटकर ₹15,000 की छोटी पूँजी से रिलायंस कमर्शियल कॉर्पोरेशन की शुरुआत की, तथा 1966 में अहमदाबाद में कपड़ा मिल स्थापित कर विमल ब्रांड को घरेलू नाम बना दिया।

उनकी सफलता के पीछे कई लोग सत्तारूढ़ नेताओं तक पहुँच और 'लाइसेंस राज' का लाभ उठाने को मानते हैं, लेकिन 1977 में रिलायंस को सार्वजनिक क्षेत्र में लाकर उन्होंने भारतीय पूँजी बाजार में क्रांति ला दी। उनके निधन के बाद, बेटों मुकेश और अनिल ने विरासत को संभाला, जिसकी बदौलत 2007 तक परिवार की संयुक्त संपत्ति $100 अरब से अधिक हो गई, जिससे अंबानी परिवार दुनिया के सबसे धनी परिवारों में शुमार हो गया।