गौरीशंकर हीराचंद ओझा
डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (1863-1947) भारत के एक प्रसिद्ध इतिहासकार थे, जिन्हें राजस्थान के इतिहास का मार्गदर्शक कहा जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर 1863 को मेवाड़-सिरोही की सीमा पर स्थित रोहिड़ा गांव में हुआ था और वे कविराज श्यामलदास को अपना गुरु मानते थे। उनकी सबसे महत्वपूर्ण कृति 'भारतीय प्राचीन लिपिमाला' (1894) मानी जाती है, जो भारतीय अभिलेखों और प्राचीन लिपियों के अध्ययन की पहली प्रामाणिक पुस्तक थी। ओझा जी ने उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे कई राज्यों का विस्तृत इतिहास लिखा, जिसके लिए उन्होंने शिलालेखों, सिक्कों, विदेशी यात्रियों के विवरण और दुर्लभ पांडुलिपियों का प्रयोग किया। साथ ही, उन्होंने इतिहास लेखन में पाद-टिप्पणी (फुटनोट) की परंपरा शुरू की, जिससे आधार स्रोतों की सत्यता प्रमाणित होती है। उनके प्रयासों से ही राजस्थान के इतिहास को वैज्ञानिक और विश्वसनीय दृष्टि मिली; अंततः 17 अप्रैल 1947 को अपनी जन्मभूमि रोहिड़ा में उनका निधन हो गया।
Source: गौरीशंकर हीराचंद ओझा — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi